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MAATE PICKLES

कुछ स्वाद कभी नहीं भूलते...

कुछ खुशबूएं होती हैं,
जो सालों बाद भी
नाक से नहीं, रूह से महसूस होती हैं।

सरसों के तेल का वो पहला धुआँ,
जब कड़ाही गरम होती है —
जैसे घर जाग उठता हो।

हींग का वो तीखा, गरम झोंका,
जो तेल से मिलते ही
पूरे आँगन को अपना बना लेता है।

सुबह की पहली धूप से पहले,
कच्चे आमों की वो खट-खट —
जैसे किसी ने नींद में ही
घर को खुशबू से भर दिया हो।

और वो मिट्टी के घड़े —
छत पर धूप में बैठे, चुपचाप —
हफ्तों तक सूरज से बातें करते हुए,
धीरे-धीरे पकते हुए,
गहरे होते हुए।